#प्रेम

इस अंजुमन से परे
उद्विग्न मन की अविरलता..!
काल के कपाल की मधुरता ..
तेरे दिल - मन की निर्मलता..!
चलकर दो चार क़दम दूबों पर यूँ ही
आँखों में भरकर ओस की स्निग्धता
चूम लिया करो ना क़दमों से अपने
पागल ओस की मधुर शीतलता..!!

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