तू तो ज़रिया है मेरी मुसाफिरी का..
मेरी रहमत-ए-रूह को यूं गुलज़ार न कर..!
अगर हो मलाल 'विराग' न मिलने का..
तो रातों की सोखी का इंतज़ार न कर..🌹

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